ऐ चौकीदार तू सच सच बोल! इमरान प्रतापगढ़ी।

हिंदी उर्दू के मशहूर शायर और कांग्रेसी नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने चीनी सैनिकों के नापाक हरकतों द्वारा हमारे 20 जवानों की शहादत पर केंद्र सरकार के अलग-अलग बयानों की आलोचना करते हुए उनपर कड़ा प्रहार किए हैं।

वर्तमान के हालात को नज्मों द्वारा बयां करने वाले शायर ने अपने गीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को. जो खुद को चौकीदार कहते है उन्हें सच बोलने की सलाह दी है। इस नज़्म को इमरान प्रतापगढ़ी ने एक ही घटना पर रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री के अलग-अलग बयानों के आधार पर तैयार किया है।

नज़्म की शुरुआत में ही शायर ने प्रधानमंत्री पर प्रहार करते हुए कहा है कि “ऎ चौकीदार तू सच सच बोल” प्रधानमंत्री ने लद्दाख में चीनी सैनिकों द्वारा 20 भारतीय जवानों की शहादत पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसके अंत में उन्होंने कहा था कि “न वहां कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी के क़ब्ज़े में है। लद्दाख में हमारे 20 जांबाज जवान शहीद हुए, जिन्होंने भारत माता की तरफ आँख उठाकर देखा था, उन्हें वो सबक सिखाकर गए है” उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।

प्रधानमंत्री के बयान और रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री के बयानों में काफी मतभेद है। विपक्ष सरकार के इन्हीं बयानों को लेकर उनपर हमलावर है। इमरान प्रतापगढ़ी भी विपक्षी नेता है। उन्होंने आगे कहा है कि यह सरकार इतिहास बदलने आई थी लेकिन भूगोल बदल रही है। इमरान प्रतापगढ़ी ने इशारा किया है कि इस सरकार की “कथनी” और “करनी” में अंतर है।

प्रधानमंत्री के बयान को सेटेलाइट की तस्वीरें स्पष्ट रूप से झूठलाती हैं। तो सवाल यह पैदा होता है कि आखिर प्रधानमंत्री ने ऐसा बयान क्यों दिया? इस बात को समझाने के लिए मुझे आपको 17 से 18 साल पीछे ले कर जाना होगा। गुजरात में 2002 के दंगों के बाद आज के प्रधानमंत्री और उस समय के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका समेत कई देशों ने वीजा देने से इनकार कर दिया था।

गुजराती मुख्यमंत्री का वीजा रद्द करने वाले देशों में चाइना शामिल नहीं था। गुजरात के मुख्यमंत्री ने चार बार चाइना का दौरा किया और गुजरात के अहमदाबाद में अनेक चाइनीज कंपनियां लाकर स्थापित कर दिया. जो आज भी कार्यरत है। 2014 के विधानसभा चुनाव के प्रचार में भाजपा और आरएसएस ने मिलकर चाइनीज सामानों का बहिष्कार करने की ढोंग का हुंकार भरा था।

लेकिन नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्ति का निर्माण करने के लिए 300 करोड़ का ठेका चाइना को दे दिया गया. दुनिया की सबसे बड़ी और लंबी मूर्ति जो आज भारत में है उसका निर्माण भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कृपा से चाइना द्वारा की गई है।

चाइना से सैनिकों की शहादत का बदला और उसके सामानों का बहिष्कार आप सभी को मूर्ख बनाने की एक चाल है। खेल तो वह सामने से ही खेल रहे हैं लेकिन संप्रदायिकता की आग में हम उसे पहचान नहीं पा रहे हैं। नहीं तो पाकिस्तानी कबूतर का भारतीय सीमा में प्रवेश टेलीविजन स्क्रीनों पर घंटों भर चर्चा का विषय कभी नहीं बनता।

2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान चाइना की समस्त सरकारी अखबारों ने खबर छापी थी कि वह चाहती है कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार स्थापित हो। चाइना को इस बात का डर सता रहा था कि अगर गुजरात में गैर बीजेपी सरकार आती है तो अहमदाबाद में स्थापित समस्त चाइनीज कंपनियों पर ग्रहण लग सकता है।

पिछले 6 वर्षों में प्रधानमंत्री ने चाइना का तकरीबन 18 मरतबा दौरा किया है। दौरा दो देशों के बीच मधुर संबंध बनाने के लिए किए जाते हैं. लेकिन चाइना का भारत के प्रति क्रूर व्यवहार प्रधानमंत्री के दौरे पर सवाल खड़ा करता है। चाइनीज प्रधानमंत्री शी जिनपिंग को हमारे प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से निर्मित चाय पिलाया था। लेकिन चाय पीने वाला व्यक्ति हमारे 20 जवानों का हत्यारा निकला.

सन 1947 में यह देश स्वतंत्र होने के बाद जब 1950 में एक गणराज्य के रूप में विकसित हुआ. उसके बाद इस देश की संसद ने मानवता की अनेक तस्वीरें देखी हैं. जो आज की सियासत से काफी दूर हैं। छोटी सी छोटी घटना घटित होने पर भी संबंधित मंत्री खुद पर जिम्मेदारी ले कर अपने पद से इस्तीफा दे देते थे। शायद इसीलिए हमारे देश को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र का खिताब हासिल है।

पिछले कुछ वर्षों में देश पर स्थापित हुई सरकार के पुस्तक में इस्तीफा का पाठ गायब है। छोटी-छोटी घटनाएं तो प्रतिदिन की समान्य बात बन गई है लेकिन बड़ी घटनाओं पर भी कोई खुद पर जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। हालांकि सरकार खुद को मजबूत बताने पर अड़ी हुई है. बता भी रही है। अगर सरकार के झूठे बयान और उसके प्रचार-प्रसार को किनारे रखकर जनता को सीधे जमीनी स्तर से देखें तो वह भूखी और नंगी नजर आएगी।

On Lock  के नियमों का पालन करें स्वयं हित में, समाज हित में, राष्ट्रहित में, Covid-19 की गंभीरता को नजरअंदाज न करें अपना बचाव करें क्योंकि बचाव ही सबसे अच्छा उपचार हैं।

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