बेंगलुरु, जो आमतौर पर अपनी तकनीकी तरक्की और स्टार्टअप कल्चर के लिए जाना जाता है, इस बार एक दिल दहला देने वाले अपराध की वजह से चर्चा में है। 36 वर्षीय राकेश राजेंद्र खेडेकर ने अपनी पत्नी गौरी अनिल सांबरेकर की हत्या कर दी और शव को एक सूटकेस में बंद कर दिया। लेकिन जो बात इस केस को और अजीब बनाती है, वह यह है कि हत्या के बाद राकेश ने खुद अपने ससुरालवालों को कॉल करके इस भयानक सच का खुलासा कर दिया।
हत्या की रात: जब प्यार नफरत में बदल गया
राकेश और गौरी महाराष्ट्र के रहने वाले थे और हाल ही में बेंगलुरु के डोड्डाकन्नाहल्ली इलाके में शिफ्ट हुए थे। राकेश एक आईटी कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर था और वर्क फ्रॉम होम कर रहा था, जबकि गौरी मास मीडिया की पढ़ाई कर चुकी थी और नई नौकरी की तलाश में थी। बाहर से देखने पर सबकुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन इस रिश्ते के भीतर बहुत उथल-पुथल थी।
26 मार्च की रात, दोनों के बीच किसी बात पर बहस शुरू हुई, जो जल्द ही हिंसक हो गई। राकेश का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उसने चाकू उठाया और गौरी पर वार कर दिया। पहले उसने पेट में वार किया और फिर गला रेत दिया। इस खौफनाक हरकत के बाद, उसने शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे एक सूटकेस में बंद कर दिया और बाथरूम में रख दिया।
गुनाह के बाद पछतावा या प्लानिंग?
हत्या के बाद राकेश वहां से भाग निकला और कुछ घंटों बाद उसने अपने ससुरालवालों को फोन किया। उसकी आवाज में डर, पछतावा या शायद कोई और ही भावना थी, लेकिन उसने बिना किसी लाग-लपेट के कह दिया—”तुम्हारी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है, मैंने उसे मार दिया है। उसका शव सूटकेस में रखा है।”
ससुरालवालों के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क किया, जिसने बेंगलुरु पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो घर के बाथरूम में खून से लथपथ सूटकेस मिला। राकेश का फोन ट्रैक किया गया और उसे पुणे के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या यह एक सामान्य घटना थी?
ऐसी घटनाएं अब समाज में नई नहीं रहीं। हर दिन, किसी न किसी को अपने ही रिश्तों में धोखा, गुस्सा, हिंसा और अंततः मौत का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह नहीं है कि राकेश ने ऐसा क्यों किया, बल्कि यह है कि हमारे समाज में रिश्तों की डोर इतनी कमजोर क्यों होती जा रही है?
मनोरोग विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ता अकेलापन, गुस्से पर नियंत्रण की कमी और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी इस तरह के अपराधों के पीछे बड़ी वजह बन रही है। आजकल रिश्तों में सब्र कम और अपेक्षाएं ज्यादा हो गई हैं। लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ने या हिंसा पर उतरने लगे हैं।
क्या कानून सबकुछ ठीक कर सकता है?
राकेश को अब सख्त सजा मिलेगी। शायद उम्रकैद या फांसी तक हो सकती है। लेकिन क्या इससे ऐसी घटनाएं रुक जाएंगी? कानून अपराधियों को सजा दे सकता है, लेकिन अपराध को होने से नहीं रोक सकता। जब तक समाज में संवाद, समझदारी और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी।
बेंगलुरु की इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि अगर रिश्तों में संवाद खत्म हो जाए और गुस्सा हावी हो जाए, तो प्यार भी कितनी खतरनाक नफरत में बदल सकता है। अब सवाल यह है—क्या हम अपने रिश्तों को बचाने के लिए कुछ कर रहे हैं, या फिर ऐसी घटनाएं हमें यूं ही झकझोरती रहेंगी?