“पूर्वांचल का शेर थे शाकिर अली” जो कहते थे वह करते थे।

देवरिया – गरीबों के मसीहा, जनता के लोकप्रिय बेटा, पूर्व सरकारों के मंत्री, समाजवादी पार्टी के वरिष्ट नेता माननीय शाकिर अली इस दुनिया को अलविदा कह गये।

पूर्वांचल के यह सितारा जब राजनीति में अपना कदम आगे बढ़ाये फिर पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखे। वो ऐस नेता थे जिसका दिल हमेशा जनता के लिए धड़कता था।

वो जनता कि समस्या को बड़े ही आसानी से निष्कर्ष तक पहुंचा देता थे। वह जनता का ऐसा प्रतिनिधि थे जो कहते थे उसे करते थे।

राजनीति की उन्हें इतनी अच्छी समझ थी कि वो जितनी बार जीते हर बार मंत्री बने। कमाल तो उन्होंने 2012 में कर दिखाया जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को हराकर विधानसभा पहुंचे।

इस बार समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार ने उन्हें मंत्री पद से वंचित रखा। फिर भी वो जनता के लिए वह काम कर दिखाये जो लोग मंत्रिमंडल पा कर भी नहीं कर पाते है।

मै अगर उनके द्वारा कराए गए कार्यों को गिनाने लगूं तो यक़ीनन आप थक जाएंगे। लेकिन उनके द्वारा कराए गए कार्यों का अंत नहीं मिलेगा।

आप उनके द्वारा कराए गए कार्यों का अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि उनके विधानसभा क्षेत्र पथरदेवा की जनता कहती है कि आजादी से लेकर आज तक उतने कार्य कभी नहीं हुए जितना कार्य माननीय शाकिर अली जी ने 5 वर्षों में कर दिखाया है।

अच्छी राजनीति की समझदारियां उम्र की पड़ाव को कब रोक पायी है? उम्र की ढलाव के साथ साथ उन्हें डायबिटीज और किडनी की बीमारी की शिकायत हो गई थी। परेशानियां बढ़ने पर लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल में उन्हें इलाज कराने के लिए भर्ती कराया गया।

राजनीति का यह चाणक्य पहलवान पिछले एक महीने से मेदांता में अपनी जिंदगी की जंग जीतने का प्रयास कर रहा थे। अफसोस असफल रहे।

रविवार की रात लगभग 12:00 बजे वह अपनी जिंदगी की जंग हार गये। वह इस दुनिया से इतना दूर चले गये जहां जाकर लोग वापस कभी नहीं लौटते।

आज उनके पैतृक गांव में उन्हें सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। इस तरह यह पूर्वांचल का वह सूरज लुप्त हो गया। जिसके चमकने से लाखों लोगों के घरों में उजाला हुआ करता था।

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