Coronavirus: भूखे सोने के लिए मजबूर है दिहाड़ी मजदूर! सरकार बेखबर।

नई दिल्ली: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में 21 दिनों के लॉक डाउन की अवधि समाप्त होने वाली है। हालांकि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण पर अंकुश नहीं लगा है। जिसके कारण देश में अगले 2 हफ्ते तक लॉक डाउन की तय सीमा बढ़ाई जा सकती है।

देश के कई मुख्यमंत्रियों ने अपने प्रदेशों को पूरा अप्रैल बंद कर देने का एलान कर दिया है। लॉक डाउन के बावजूद भी देश में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। देश में अब तक 9152 मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं जिसमें 857 ठीक भी हुए हैं। संक्रमित बीमारी से 308 लोग अपनी जान गवा चुके हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण ने देश की रफ्तार को पूरी तरह ठप कर दिया है। समस्त देशवासी अपने घरों में कैद हैं। यह वायरस लोगों को आपस में मिलने जुलने से तेजी से फैलता है। इसलिए सरकार ने देश में लॉक डाउन लागू कर दिया कि लोग आपस में मिलना जुलना बंद कर दें और संक्रमित बीमारी पर जल्द से जल्द काबू पाया जा सके।

वायरस के संक्रमण से प्रभावित भारत पुनः पटरी पर कब लौटेगा इसका अनुमान लगाना कठिन है। यह बात सत्य है कि लॉक डाउन की वजह से इस वायरस से काफी कम लोग संक्रमित हुए हैं। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि लॉक डाउन वजह से तकरीबन 30 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। और आज भी दिहाड़ी मजदूर भुखमरी के शिकार हैं।

संक्रमण से रोकथाम के लिए लॉक डाउन सरकार का सराहनीय कदम है, लेकिन गरीब मजदूर और बेबस नागरिकों का ख्याल रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है। लॉक डाउन के साथ देश की समस्त दैनिक सेवाएं बाधित हैं जिससे अपने प्रदेश को छोड़कर औद्योगिक नगरों में रोजी रोटी कमाने गए मजदूर फंसे हुए हैं।

मजदूरों के अनुसार उनके लिए सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई है। आसपास के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा वितरित की जा रही पैकेज को दिहाड़ी मजदूर लेकर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का निर्वाहन कर रहे हैं। और बाधित ट्रेन खुलने का इंतजार कर रहे हैं जिससे वह अपने प्रदेश सकुशल वापस लौट सकें।

सरकार का गरीबों तक पहुंचने वाला पैकेज का दावा सिफर (शून्य) साबित हो रहा है। कमियां कहां है, और कौन कर रहा है, अगर सरकार यह पैकेज वास्तव में गरीबों तक वितरित कर रही है तो यह जमीनी स्तर पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा है। केंद्र व राज्य सरकारों को मंथन कर गरीब व असहाय लोगों को सीधे मदद करनी चाहिए जिससे वह भूखे न सो सके।

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