खुलेआम बीजेपी का प्रचार कर रहे है हिंदी न्यूज चैनल!

देश भले ही 1947 में आजाद हो गया हो लेकिन लोकतंत्र का चौथा पिलर मीडिया खास कर हिंदी न्यूज चैनल आज भी गुलाम है। वे खुलेआम सरकार का प्रचार प्रसार का बीड़ा उठा लिया है.

मेरे बातों का सत्यापन आप गुजरात या दिल्ली के एमसीडी चुनाव में मीडिया की भूमिका को देख कर, कर सकते है। देश का कोई भी चुनाव असल मुद्दों पर नहीं हो रहा है, चुनाव दर चुनाव संप्रदायकता नजर आती है.

टीवी पर डिबेट के नाम पर एंकर हर रोज अल्पसंख्यकों के विरुद्ध देश के जनता में नफरत का जहर घोल रहे है. ताकि देश में हिंदुओं की हितैत बताने वाली बीजेपी को समस्त बहुसंख्यकों का वोट मिल सके।

खुलेआम बीजेपी का प्रचार प्रसार करते एंकरों को देश की महंगाई, बेरोजगार युवा, बिकती राष्ट्रीय संपत्ति, घटते रोजगार, बर्बाद होते गरीब जनता नजर नहीं आ रही है, वे बेशर्मी के साथ लोगों को गुमराह कर रहे है.

खबरों के नाम पर लोगों को गैरप्रमाणिक कुछ भी अनाब शनाब जानकारियां चैनलों पर धरल्ले से चलाए जा रहे है, आज के दौर के हिंदी चैनल पत्रकारिता के किसी भी मानक के आधीन कार्य नही कर रहे है.

सरकार भी इनके रवैया से खुश है क्योंकि ये उसकी हर गलत नीति को जनता के लिए वरदान बताते है, यही कारण है कि गोदीगीरी करने वाले एंकरों पर गलत जानकारी देने पर भी कोई कार्यवाही नहीं होती है.

सरकार चाहती ही है की देश में उसके विरुद्ध कोई आवाज न उठे. 2014 से बीजेपी सरकार आने के बाद से ही मीडिया ने सरकार से सवाल करना बंद कर दिया और उसके गुड़गांन करने लगे. पिछले आठ सालों से प्रधानमंत्री ने एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं किया.

देश में मीडिया का रवैया अगर ठीक होता तो प्रधानमंत्री भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए मजबूर हो जाते, देश गरक में जाने से बच जाता. सरकार के हर गलत नीतियों पर अगर मुखरता से तीखे सवाल होते तो आज देख उन्नति की तरफ कार्यरत होता.

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