कोरोना वायरस: कहीं ऐसा न हो सारा सफर बेकार हो जाए!

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के प्रभाव को रोकने के लिए लॉक डाउन की तय सीमा अनेक वरीयताओं के साथ मई के अंत तक बढ़ा दी गई है। सवाल यह है कि समस्त रूप से बंद भारत में कोरोना वायरस लगभग 2 महीनों में एक लाख लोगों में संक्रमित हो गया है। अब भी इसके बढ़ते प्रभाव में कमी नहीं आई है हालांकि प्रत्येक दिन संक्रमित बीमारी नया रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा दिया गया छूट देश के लिए खतरे की घंटी बजा सकता है।

देश के अनेक राज्यों में लोग अब पहले जैसे निकलना शुरू हो चुके हैं। कुछ मानकों के आधार पर देश के 80% फैक्ट्रियों में मजदूर कार्य करने वापस आ चुके हैं। सुबह शाम सड़कों पर सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ रही है। अनेक कंपनियां सोशल डिस्टेंस को नजरअंदाज कर वर्करों से कार्य करवा रही है। हद तो यह है कि अधिकांश कंपनियों के मालिक जो कभी कंपनियों से हटते नहीं थे आज नजर नहीं आ रहे हैं। वह अपने घरों में बैठकर लॉक डाउन का पालन कर रहे हैं।

यह बात स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि हमारे देश में मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं है। लॉक डाउन के बाद से जो देश में मजदूरों की हालत हुई है उससे कोई भी अनजान नहीं है। मजदूरों के साथ सरकार ने जिस प्रकार का व्यवहार किया है उसकी निंदा करने के लिए हमारे पास कोई शब्द नहीं है। केंद्र में काबिज सरकार जब से सत्ता में आई है उद्योगपतियों को ही राहत देने में लगी हुई है। विकास को गति देने के लिए 20 लाख करोड़ की घोषणा निर्माताओं की झोली भरने के लिए तैयार की गई है। हालांकि जिनके नाम पर यह घोषणा की गई है उन्हें शिफर (शून्य) हासिल हुआ है।

वैश्विक त्रासदी कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉक डाउन जारी है लेकिन इस बार काफी हद तक छूट दी गई है। शराब की दुकानों के साथ अधिकांश फैक्ट्रियों को खोलने के आदेश दिए गए हैं तो मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों समेत समस्त धार्मिक स्थलों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है। सरकार विद्यालयों पर लगी पाबंदी को नहीं हटाई है। बात साफ है कि विद्यालय भी बंद रहेंगे।

संक्रमित वायरस लॉक डाउन के बावजूद भी अपना पांव पसारता रहा। समस्त रूप से देश के सभी गतिविधियों पर ब्रेक लगने के बावजूद भी कोरोना वायरस तकरीबन 2 महीने में एक लाख लोगों में संक्रमित हो गया। अगर देश को बंद नहीं किया गया होता तो यह बीमारी अब तक देश की आधी आबादी को अपनी जद में ले चुका होता।

लॉक डाउन में छूट देकर उद्योगपतियों को राहत देने के लिए अगर सरकार मजदूरों की जिंदगी के साथ खेल खेल रही है तो यह खेल देश के लिए बहुत भारी पड़ने वाला है. अगर ऐसा है तो 2 महीने का सफल लॉक डाउन का सफर बेकार होने वाला है।

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