किताबों की दुनिया।

आज के जमाने में अंग्रेजी भाषा का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है। बच्चे अंग्रेजी माध्यम में ज्यादा पढ़ाई करते हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि वह मातृभाषा की किताबें पढ़ें।

और दूसरी बात यह है कि चाहे वह डिजिटल मीडिया के जरिए किताबें पढ़ें या फिर भौतिक रूप से हाथ में लेकर किताबें पढ़ें। पर वह क्या पढ़ रहे हैं यह देखना जरूरी है।

बच्चे अर्थपूर्ण विषयों की पढ़ाई न करें ऐसी सामग्री न पढ़े जो खोखली हो और जिनसे बच्चों को कुछ हासिल नहीं हो रहा हो।

अमूमन बच्चे हंसी, मजाक, व्यंग और मौज मस्ती से भरी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं। पर हमारे लिए जरूरी है कि बच्चों को कालजई साहित्य से जोड़े।

रविंद्र नाथ टैगोर, मुंशी प्रेमचंद, कबीर दास, तुलसीदास, महादेवी वर्मा जैसे विद्वानों द्वारा रचित कहानियों को पढ़ें।

दरअसल बच्चों में पढ़ने की आदत तब विकसित होगी जब घर का माहौल वैसा होगा। जब घर के बड़े पढ़ रहे होंगे तो बच्चे उनका अनुकरण करेंगे।

और अपने लिए पढ़ने की किताबें खोजेगे। बच्चों को अच्छी किताबें मुहैया कराना घर और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी है।

आज एक बहुत अच्छा चलन शुरू हुआ है। इसे रीडिंग चैलेंज कहा जाता है।

साल के शुरुआत में ही कुछ लोग अपने लिए चुनौती तय कर लेते हैं। वह हर महीने इतनी किताबें पड़ेंगे।

इसके बाद वह हफ्तेवार जो कुछ भी पढ़ते चले जाते हैं उसे सोशल या मोबाइल मीडिया पर शेयर करते हैं। इस तरह वह अपने गर्व का प्रदर्शन करते हैं।

और दूसरों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। वह बताते हैं कि हर महीने वह इतनी किताबे पढ़ रहे हैं।

इस तरह सामने वाला भी पढ़ाई से जुड रहा है। इस तरह से एक पढ़ने की सीरीज शुरुआत हो रही है। हम स्वयं भी पढ़ रहे हैं और दूसरों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

एक समय परिवार में तय होना चाहिए कि घर के सभी सभी सदस्य मोबाइल टेलीविजन व इंटरनेट से दूर हट कर एक साथ बैठकर किताबें पढ़ेंगे।

दोस्तों पढ़ना सिर्फ समय काटना नहीं है बल्कि यह ज्ञान बढ़ाने का एक प्रमुख साधन है। इससे सज्जनता बढ़ती है। जानकारियों का विस्तार होता है।

मोबाइल टेलीविजन व इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताना कल्पना करने की क्षमता पर प्रभाव डालता है। इससे स्वयं को भी और अपने बच्चों को भी दूरी बनाए रखने की जरूरत है।

मोबाइल टेलीविजन इंटरनेट का इस्तेमाल सिर्फ जरूरत के लिए किया जाए।

किताबों को पढ़ने से व्यक्तित्व निखरता है। शब्दकोश में इजाफा होता है। सोचने समझने की शक्ति का विस्तार होता है।

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